शिक्षकों का आंदोलन: टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ तेज़ विरोध

बिजनौर। टीचर्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा के आह्वान पर देशभर के शिक्षक टीईटी (Teacher Eligibility Test) की अनिवार्यता के खिलाफ एकजुट होकर आंदोलन को तेज़ कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर शिक्षकों ने बड़े पैमाने पर ट्वीट कर अपनी नाराज़गी जताई और सरकार से इस नियम को वापस लेने की मांग की।

आंदोलन की मुख्य बातें

  • सोशल मीडिया पर विरोध: शिक्षकों ने एक्स पर लगातार पोस्ट कर टीईटी की अनिवार्यता को शिक्षा जगत के लिए अनुचित बताया।
  • काली पट्टी अभियान: आज से शिक्षकों ने अपनी बाहों पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है।
  • आंदोलन का विस्तार: देशभर में आंदोलन को और तेज़ करने का निर्णय लिया गया है।
  • स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम: 26 फरवरी को बिजनौर जिले के शिक्षक जिला मुख्यालय तक पैदल मार्च करेंगे।

शिक्षकों की दलील

शिक्षकों का कहना है कि टीईटी की अनिवार्यता से पहले से कार्यरत शिक्षकों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उनका मानना है कि अनुभव और वर्षों की सेवा को दरकिनार कर केवल एक परीक्षा को आधार बनाना शिक्षा व्यवस्था के साथ अन्याय है।

आगे की रणनीति

टीचर्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया ने संकेत दिया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक विरोध की आवाज़ बुलंद की जाएगी।