बिजनौर गंगा बैराज निरीक्षण: सिल्ट सफाई से तटबंध को मिलेगा नया जीवन, IIT कानपुर टीम ने दी तकनीकी सलाह

बिजनौर जनपद में गंगा बैराज का रावली तटबंध पिछले वर्ष की बरसात में टूटने से बाल-बाल बचा। भारी वर्षा और गंगा में बढ़ते जलस्तर ने तटबंध पर लगातार दबाव बनाया, जिससे स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। प्रशासनिक अमला और तकनीकी टीमें दिन-रात मौके पर मौजूद रहीं और समय रहते किए गए प्रयासों के कारण तटबंध को टूटने से बचाया जा सका।

इस बार प्रशासन ने तटबंध की सुरक्षा को लेकर विशेष रणनीति अपनाई। गंगा में जमा हो रही सिल्ट को खतरे का मुख्य कारण माना गया। सिल्ट के कारण नदी का प्रवाह बाधित होता है और दबाव तटबंध पर बढ़ जाता है। इसी वजह से यह निर्णय लिया गया कि गंगा में सिल्ट की नियमित सफाई कराई जाएगी। इस कार्य के लिए आईआईटी कानपुर की विशेषज्ञ टीम और बैराज यांत्रिक अनुरक्षण खंड के इंजीनियरों ने संयुक्त रूप से निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने तटबंध की मजबूती, मिट्टी की परतों की स्थिति और जल प्रवाह का गहन अध्ययन किया। उनका सुझाव था कि सिल्ट की नियमित सफाई से तटबंध पर दबाव कम होगा और भविष्य में टूटने की आशंका घटेगी। साथ ही बैराज के यांत्रिक उपकरणों की भी जांच की गई ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।

स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस बार बरसात के दौरान तटबंध पर खतरा मंडराने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए तकनीकी उपायों के साथ-साथ आपदा प्रबंधन दल को भी तैयार रखा गया है। ग्रामीणों को सतर्क रहने और किसी भी असामान्य स्थिति की सूचना तुरंत देने के निर्देश दिए गए हैं।

यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशासनिक तत्परता का संयोजन बेहद जरूरी है। यदि समय रहते निरीक्षण और सुधारात्मक कदम उठाए जाएं तो बड़े हादसों को टाला जा सकता है। बिजनौर गंगा बैराज का रावली तटबंध इस बार सुरक्षित रहा, लेकिन भविष्य के लिए सिल्ट सफाई और नियमित निगरानी ही स्थायी समाधान साबित होंगे।

मुख्य बिंदु

  • भारी वर्षा और जलस्तर बढ़ने से तटबंध पर दबाव
  • सिल्ट को खतरे का प्रमुख कारण माना गया
  • IIT कानपुर की टीम ने निरीक्षण कर तकनीकी सुझाव दिए
  • सिल्ट सफाई से तटबंध पर दबाव कम होगा
  • प्रशासन ने आपदा प्रबंधन दल को तैयार रखा
  • ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश