महाशिवरात्रि पर देशभर में शिव भक्तों का उत्साह
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर पूरे देश के शिवालयों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर तक “बम-बम भोले” की गूंज सुनाई दे रही है। श्रद्धालु दूर-दूर से आकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर रहे हैं और भगवान शिव के दर्शन कर स्वयं को धन्य मान रहे हैं।
उज्जैन में विशेष पूजा और भस्मारती
उज्जैन के महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। तड़के सुबह 3 बजे बाबा महाकाल की भस्मारती की गई। इससे पहले बाबा को पंचामृत—दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से स्नान कराया गया। चंदन का लेपन और सुगंधित द्रव्यों की अर्पणा के बाद बाबा को उनकी प्रिय विजया (भांग) से श्रृंगारित किया गया। श्वेत वस्त्र ओढ़ाने के बाद भस्म रमाने की प्रक्रिया शुरू हुई और ढोल-नगाड़ों, शंखनाद तथा झांझ-मंजीरों की गूंज के बीच भस्मारती संपन्न हुई।
महाकाल मंदिर के पट इस बार लगातार 44 घंटे खुले रहेंगे। अनुमान है कि इस अवधि में लगभग 10 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचेंगे। शिवरात्रि के अगले दिन बाबा को दूल्हे के रूप में सजाया जाता है और दोपहर में विशेष भस्मारती होती है। इस अवसर पर बाबा का सेहरा सजाया जाता है, जिसे बाद में प्रसाद स्वरूप भक्तों में वितरित किया जाता है। मान्यता है कि सेहरे के पुष्प घर में रखने से सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
शिवनवरात्रि महोत्सव
फाल्गुन माह में उज्जैन में शिवनवरात्रि महोत्सव का आयोजन होता है। नौ दिनों तक बाबा महाकाल को हल्दी-चंदन से सजाकर दूल्हा रूप दिया जाता है। हर दिन अलग-अलग श्रृंगार किए जाते हैं और अंत में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।








