पंजाब में सीमा पार से भेजे जा रहे ड्रोन: BSF ने की बड़ी पहचान
पंजाब में पाकिस्तान की ओर से लगातार ड्रोन भेजे जा रहे हैं। इन ड्रोन का इस्तेमाल हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए किया जाता है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने अब उन प्रमुख स्थानों की पहचान कर ली है, जहां इन ड्रोन के जरिए खेप गिराई जाती है।
🛡️ ड्रोन रोधी प्रणाली की तैनाती
BSF के अपर महानिदेशक (ADG – पश्चिमी कमान) सतीश एस. खंडारे ने बताया कि पंजाब और जम्मू में भारत-पाकिस्तान सीमा पर बड़े पैमाने पर ड्रोन रोधी प्रणाली स्थापित की जा रही है। इसका उद्देश्य है:
- सीमा पार से आने वाले ड्रोन को रोकना
- हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाना
साथ ही जम्मू क्षेत्र में सुरंगों के जरिए होने वाली तस्करी को रोकने के लिए सुरंग-रोधी प्रणाली भी लगाई जा रही है।
📊 2025 की बड़ी जब्तियां
BSF की पश्चिमी कमान ने इस वर्ष उल्लेखनीय सफलता हासिल की:
- 380 किलोग्राम से अधिक हेरोइन जब्त
- 200 से अधिक हथियार बरामद
- 278 अवैध ड्रोन पकड़े गए
- 53 पाकिस्तानी घुसपैठियों और तस्करों को गिरफ्तार किया गया
इसके अलावा अमृतसर में ड्रोन फोरेंसिक प्रयोगशाला स्थापित की गई है, जहां बरामद ड्रोन का तकनीकी विश्लेषण किया जाता है।
🔬 ड्रोन का फोरेंसिक विश्लेषण
BSF अधिकारी ने बताया कि हर बरामद ड्रोन का फोरेंसिक अध्ययन किया जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके:
- उसने कितनी उड़ानें भरीं
- किस स्थान से उड़ान भरी
- किन जगहों पर खेप गिराई
इसी आधार पर पंजाब और राजस्थान में कुछ प्रमुख स्थानों की पहचान की गई है।
👮 दुर्गम इलाकों में जवानों की तैनाती
BSF ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जवानों को दुर्गम इलाकों में तैनात किया जाए, क्योंकि तस्कर अक्सर ऐसे ही क्षेत्रों में ड्रोन से खेप गिराते हैं।
📜 ड्रोन तस्करी का इतिहास
- 2019 में पहली बार पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल सामने आया था।
- तब से लगातार छोटे आकार के ड्रोन और सीमित मात्रा की खेप भेजने की कोशिशें होती रही हैं।
⚙️ बदलती तकनीक और चुनौतियां
- पहले बड़े ड्रोन आते थे, अब सस्ते और छोटे ड्रोन इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
- एक ड्रोन अब लगभग 500 ग्राम हेरोइन या एक पिस्तौल ले जा सकता है।
- फ्रीक्वेंसी हॉपिंग ड्रोन भी सामने आए हैं, जिन्हें पकड़ना और ट्रैक करना मुश्किल है।
- जैसे-जैसे ड्रोन तकनीक विकसित हो रही है, वैसे ही BSF भी ड्रोन रोधी तकनीक को लगातार उन्नत कर रहा है।








